MP Board Class 10 Science Ch4: Carbon Compounds Hindi Notes

कार्बन एवं उसके यौगिक (Carbon and its Compounds) MP Board Class 10 विज्ञान का अध्याय 4 है, जो बोर्ड परीक्षा 2027 की दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण अध्यायों में से एक है। इस अध्याय से प्रत्येक वर्ष बोर्ड परीक्षा में लगभग 5-6 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं — इनमें सहसंयोजी बंध, क्रियात्मक समूह, रासायनिक अभिक्रियाएँ, एथेनॉल-एथेनॉइक अम्ल तथा साबुन-अपमार्जक से प्रश्न आते हैं। यहाँ हमने mpboard.ai पर इस अध्याय की सम्पूर्ण हिंदी नोट्स 2027 दी हैं — सरल भाषा में, सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं, रासायनिक समीकरणों, सूत्रों और परीक्षा उपयोगी प्रश्नों के साथ। इन नोट्स को पढ़कर आप इस अध्याय से पूरे अंक प्राप्त कर सकते हैं।

📑 अनुक्रमणिका (Table of Contents)

🔬 कार्बन का परिचय

कार्बन (Carbon) एक अधातु तत्व है जिसका प्रतीक C और परमाणु क्रमांक 6 है। इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 4 है अर्थात इसके सबसे बाहरी कक्ष (K कोश के बाद L कोश) में 4 इलेक्ट्रॉन होते हैं। कार्बन पृथ्वी पर सर्वत्र पाया जाता है — हमारे शरीर में, भोजन में, वस्त्रों में, पेट्रोलियम में, हीरे में और यहाँ तक कि हवा में मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) में भी।

रसायन विज्ञान की वह शाखा जो कार्बन के यौगिकों का अध्ययन करती है, कार्बनिक रसायन (Organic Chemistry) कहलाती है। कार्बन के यौगिकों की संख्या लगभग 50 लाख (5 मिलियन) से भी अधिक है — यह अन्य सभी तत्वों के यौगिकों से कई गुना अधिक है। यही कारण है कि कार्बन को रसायन विज्ञान का ‘राजा’ भी कहा जाता है।

🎯 MP Board टिप: बोर्ड परीक्षा 2027 में ‘कार्बन के यौगिकों की संख्या अधिक क्यों है?’ या ‘कार्बनिक रसायन किसे कहते हैं?’ जैसे 1 अंक के प्रश्न अक्सर पूछे जाते हैं। उत्तर में श्रृंखलन (Catenation) और चतुःसंयोजकता (Tetravalency) अवश्य लिखें।

⚛️ कार्बन की चतुःसंयोजकता एवं इलेक्ट्रॉनिक विन्यास

कार्बन का परमाणु क्रमांक 6 है, अतः इसके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास में पहले कक्ष (K) में 2 और दूसरे कक्ष (L) में 4 इलेक्ट्रॉन होते हैं — 2, 4। सबसे बाहरी कक्ष में 4 इलेक्ट्रॉन होने के कारण कार्बन न तो 4 इलेक्ट्रॉन दे पाता है (क्योंकि इसके लिए बहुत अधिक ऊर्जा चाहिए) और न ही 4 इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर पाता है (क्योंकि उसके कोश में केवल 4 स्थान हैं)।

अतः कार्बन अपने 4 बाहरी इलेक्ट्रॉनों को दूसरे परमाणुओं (कार्बन या अन्य तत्वों) के साथ साझा (share) करके अष्टक (Octet) पूर्ण करता है। इलेक्ट्रॉन साझा करने से बना बंध सहसंयोजी बंध (Covalent Bond) कहलाता है। चूँकि कार्बन 4 इलेक्ट्रॉन साझा करता है, इसलिए उसकी संयोजकता 4 होती है — इसे चतुःसंयोजकता (Tetravalency) कहते हैं।

चतुःसंयोजकता ही कार्बन की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता है। इसी के कारण कार्बन एक परमाणु से दूसरे परमाणु के साथ एकल (single), द्वि (double) या त्रि (triple) बंध बना सकता है, और अपने ही परमाणुओं से लंबी श्रृंखलाएँ बना सकता है।

🔗 सहसंयोजी बंध (Covalent Bond)

जब दो परमाणु अपने बाहरी कक्ष के इलेक्ट्रॉनों को परस्पर साझा करते हैं, तो उनके बीच बनने वाले रासायनिक बंध को सहसंयोजी बंध कहते हैं। यह बंध अधातु-अधातु के बीच बनता है। उदाहरण के लिए:

  • हाइड्रोजन अणु (H₂): दो हाइड्रोजन परमाणु अपने-अपने 1 इलेक्ट्रॉन को साझा कर एक सहसंयोजी बंध बनाते हैं — H–H
  • ऑक्सीजन अणु (O₂): दो ऑक्सीजन परमाणु 2-2 इलेक्ट्रॉन साझा कर द्वि-बंध (double bond) बनाते हैं — O=O
  • नाइट्रोजन अणु (N₂): दो नाइट्रोजन परमाणु 3-3 इलेक्ट्रॉन साझा कर त्रि-बंध (triple bond) बनाते हैं — N≡N
  • क्लोरीन अणु (Cl₂): Cl–Cl एकल सहसंयोजी बंध
  • मेथेन (CH₄): कार्बन का 1 परमाणु 4 हाइड्रोजन परमाणुओं से 4 एकल बंध बनाता है

सहसंयोजी यौगिकों के प्रमुख गुण: (1) ये प्रायः गैस या वाष्पशील द्रव होते हैं, (2) इनके गलनांक एवं क्वथनांक कम होते हैं, (3) ये जल में सामान्यतः अघुलनशील होते हैं परंतु कार्बनिक विलायकों में घुल जाते हैं, (4) ये विद्युत का चालन नहीं करते क्योंकि इनमें आयन नहीं होते।

📘 Key Point: बोर्ड परीक्षा में ‘सहसंयोजी बंध किसे कहते हैं? उदाहरण सहित समझाइए’ (2-3 अंक) बहुत बार पूछा गया है। चित्र बनाकर इलेक्ट्रॉन साझा करने की प्रक्रिया दिखाना अनिवार्य है।

💎 कार्बन के अपररूप (Allotropes of Carbon)

किसी तत्व के भौतिक रूप से भिन्न परंतु रासायनिक गुणों में समान रूपों को अपररूप (Allotropes) कहते हैं। कार्बन के तीन मुख्य अपररूप हैं: हीरा (Diamond), ग्रेफाइट (Graphite) और बकमिन्स्टरफुलरीन (Buckminsterfullerene / C-60)

गुण / विशेषता हीरा ग्रेफाइट
संरचना त्रिविमीय (3D) कठोर जालक — प्रत्येक कार्बन 4 अन्य कार्बन से जुड़ा स्तरित (परतदार) संरचना — प्रत्येक कार्बन 3 अन्य कार्बन से जुड़ा
कठोरता प्राकृतिक पदार्थों में सबसे कठोर मुलायम — परतें खिसक सकती हैं
विद्युत चालकता कुचालक सुचालक (मुक्त इलेक्ट्रॉनों के कारण)
उपयोग आभूषण, काँच काटना, ड्रिलिंग पेंसिल की सीसा, विद्युत-अपघटन में इलेक्ट्रोड, स्नेहक (लुब्रिकेंट)

बकमिन्स्टरफुलरीन (C-60): 1985 में खोजा गया कार्बन का तीसरा अपररूप, जिसमें 60 कार्बन परमाणु फुटबॉल जैसी गोल संरचना में व्यवस्थित होते हैं। इसके अणु का सूत्र C₆₀ है। वैज्ञानिक हैरोल्ड क्रोटो, रॉबर्ट कर्ल एवं रिचर्ड स्मैली को इस खोज के लिए 1996 में नोबेल पुरस्कार मिला।

🎯 MP Board टिप: ‘हीरा और ग्रेफाइट की संरचना में अंतर’ पर 2-3 अंक का प्रश्न बार-बार आया है। दोनों के चित्र बनाना न भूलें — चित्र पर अंक दिए जाते हैं।

🧬 कार्बनिक यौगिकों की विशेषताएँ

कार्बन के यौगिकों की संख्या इतनी अधिक होने के दो मुख्य कारण हैं:

  1. श्रृंखलन (Catenation): कार्बन परमाणुओं की अपने ही अन्य परमाणुओं के साथ लंबी, शाखित या वलयाकार श्रृंखलाएँ बनाने की क्षमता। कार्बन-कार्बन बंध अत्यंत स्थायी होता है।
  2. चतुःसंयोजकता (Tetravalency): कार्बन 4 सहसंयोजी बंध बना सकता है, जिससे अनेक प्रकार की संरचनाएँ संभव होती हैं।

इसके अतिरिक्त कार्बन अन्य तत्वों — हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, सल्फर, हैलोजन, फॉस्फोरस — के साथ भी स्थायी बंध बनाता है। कार्बन-कार्बन तथा कार्बन-अन्य तत्वों के बंध बहुत मजबूत होते हैं, जिससे ये यौगिक स्थायी बनते हैं। इसीलिए कार्बन के यौगिकों की संख्या लाखों में है, जबकि अन्य तत्वों के यौगिक कुछ हजार ही हैं।

⛽ संतृप्त एवं असंतृप्त हाइड्रोकार्बन

केवल कार्बन और हाइड्रोजन से बने यौगिकों को हाइड्रोकार्बन (Hydrocarbons) कहते हैं। ये दो प्रकार के होते हैं:

  • संतृप्त हाइड्रोकार्बन (एल्केन): जिनमें कार्बन-कार्बन के बीच केवल एकल बंध (C–C) होता है। सामान्य सूत्र CₙH₂ₙ₊₂। उदाहरण: मेथेन (CH₄), ईथेन (C₂H₆), प्रोपेन (C₃H₈), ब्यूटेन (C₄H₁₀)।
  • असंतृप्त हाइड्रोकार्बन: जिनमें कार्बन-कार्बन के बीच द्वि-बंध (C=C) या त्रि-बंध (C≡C) होता है। एल्कीन (CₙH₂ₙ) — जैसे एथीन (C₂H₄); एल्काइन (CₙH₂ₙ₋₂) — जैसे एथाइन (C₂H₂)।

संतृप्त हाइड्रोकार्बन की तुलना में असंतृप्त हाइड्रोकार्बन अधिक क्रियाशील होते हैं क्योंकि द्वि-बंध/त्रि-बंध में पाई-इलेक्ट्रॉन आसानी से अभिक्रिया में भाग लेते हैं। यही कारण है कि एल्कीन और एल्काइन योगात्मक अभिक्रियाएँ (Addition Reactions) आसानी से करते हैं।

🔄 समावयवता (Isomerism)

जिन यौगिकों का अणुसूत्र (Molecular Formula) समान होता है परंतु संरचनात्मक सूत्र (Structural Formula) भिन्न होता है, वे एक-दूसरे के समावयव (Isomers) कहलाते हैं, और यह घटना समावयवता कहलाती है।

उदाहरण: ब्यूटेन का अणुसूत्र C₄H₁₀ है, परंतु इसके दो समावयव संभव हैं — n-ब्यूटेन (सीधी श्रृंखला: CH₃–CH₂–CH₂–CH₃) और आइसोब्यूटेन (शाखित श्रृंखला: CH₃–CH(CH₃)–CH₃)। दोनों का अणुसूत्र समान है, परंतु भौतिक गुण भिन्न हैं।

इसी प्रकार पेन्टेन (C₅H₁₂) के तीन समावयव होते हैं। समावयवता के कारण ही कार्बन यौगिकों की संख्या और अधिक बढ़ जाती है।

🏷️ क्रियात्मक समूह (Functional Groups)

कार्बनिक यौगिक के अणु में उपस्थित वह विशेष परमाणु या परमाणुओं का समूह, जो उस यौगिक के रासायनिक गुणों को निर्धारित करता है, क्रियात्मक समूह कहलाता है। कार्बन श्रृंखला (R) में क्रियात्मक समूह जुड़ा होता है। क्रियात्मक समूह की उपस्थिति से यौगिक का गुण बदल जाता है।

क्रियात्मक समूह सूत्र यौगिक वर्ग प्रत्यय
हाइड्रॉक्सिल (–OH) R–OH एल्कोहॉल -ऑल (-ol)
एल्डिहाइड (–CHO) R–CHO एल्डिहाइड -एल (-al)
कीटोन (>C=O) R–CO–R’ कीटोन -वन (-one)
कार्बोक्सिल (–COOH) R–COOH कार्बोक्सिलिक अम्ल -ओइक अम्ल (-oic acid)
हैलो (–X) R–X हैलोएल्केन -हेलो (-halo)
ऐमीन (–NH₂) R–NH₂ ऐमीन -ऐमीन (-amine)

📈 होमोलॉगस श्रेणी (Homologous Series)

कार्बनिक यौगिकों की वह श्रेणी जिसमें प्रत्येक क्रमागत सदस्य पिछले सदस्य से –CH₂ (मेथिलीन समूह) से भिन्न होता है, होमोलॉगस श्रेणी कहलाती है। श्रेणी के सदस्यों को होमोलॉग कहते हैं।

एल्केन श्रेणी आण्विक सूत्र संरचनात्मक सूत्र
मेथेन CH₄ CH₄
ईथेन C₂H₆ CH₃–CH₃
प्रोपेन C₃H₈ CH₃–CH₂–CH₃
ब्यूटेन C₄H₁₀ CH₃–CH₂–CH₂–CH₃

होमोलॉगस श्रेणी के लक्षण: (1) सभी सदस्यों को एक सामान्य सूत्र से दर्शाया जा सकता है, (2) क्रमागत सदस्यों में –CH₂ का अंतर होता है, (3) श्रेणी के सदस्यों के रासायनिक गुण समान होते हैं, (4) भौतिक गुण (जैसे क्वथनांक, गलनांक) क्रमशः बदलते हैं।

📝 IUPAC नामकरण (Nomenclature)

कार्बनिक यौगिकों के नामकरण की अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को IUPAC नामकरण कहते हैं। मूल नाम कार्बन परमाणुओं की संख्या पर आधारित होता है:

कार्बन परमाणुओं की संख्या मूल नाम (उपसर्ग) एल्केन एल्कोहॉल
1 मेथ (Meth) मेथेन मेथेनॉल
2 एथ (Eth) ईथेन एथेनॉल
3 प्रोप (Prop) प्रोपेन प्रोपेनॉल
4 ब्यूट (But) ब्यूटेन ब्यूटेनॉल

नामकरण के नियम: (1) सबसे लंबी कार्बन श्रृंखला चुनें, (2) क्रियात्मक समूह को सबसे छोटा स्थान संख्या मिले, (3) संतृप्त श्रृंखला के लिए प्रत्यय -एन, द्वि-बंध के लिए -ईन, त्रि-बंध के लिए -आइन, एल्कोहॉल के लिए -ऑल लगाएँ। उदाहरण: CH₃OH = मेथेनॉल, CH₃CHO = एथेनल, CH₃COOH = एथेनॉइक अम्ल।

⚗️ कार्बन यौगिकों की रासायनिक अभिक्रियाएँ

1. दहन अभिक्रिया (Combustion)

कार्बनिक यौगिक ऑक्सीजन की उपस्थिति में जलकर CO₂ और जल बनाते हैं तथा ऊष्मा व प्रकाश छोड़ते हैं। इस प्रक्रिया को दहन कहते हैं।

CH₄ + 2O₂ → CO₂ + 2H₂O + ऊष्मा + प्रकाश

संतृप्त हाइड्रोकार्बन नीली ज्वाला के साथ जलते हैं, जबकि असंतृप्त हाइड्रोकार्बन पीली धुँआदार ज्वाला के साथ। अधूरे दहन से कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) बनता है, जो अत्यंत विषैली गैस है।

2. ऑक्सीकरण अभिक्रिया (Oxidation)

जब कार्बनिक यौगिक ऑक्सीकारक (जैसे क्षारीय KMnO₄ या अम्लीय K₂Cr₂O₇) से अभिक्रिया करता है तो एल्कोहॉल कार्बोक्सिलिक अम्ल में ऑक्सीकृत हो जाता है। उदाहरण: एथेनॉल (C₂H₅OH) → एथेनॉइक अम्ल (CH₃COOH)

3. योगात्मक अभिक्रिया (Addition Reaction)

असंतृप्त हाइड्रोकार्बन (एल्कीन/एल्काइन) में द्वि-बंध या त्रि-बंध टूटकर नए परमाणु जुड़ जाते हैं। सबसे महत्वपूर्ण उदाहरण हाइड्रोजनीकरण (Hydrogenation) है — वनस्पति तेलों में निकेल (Ni) उत्प्रेरक की उपस्थिति में हाइड्रोजन मिलाकर वनस्पति घी बनाया जाता है।

वनस्पति तेल (असंतृप्त) + H₂ →(Ni) वनस्पति घी (संतृप्त)

4. प्रतिस्थापन अभिक्रिया (Substitution Reaction)

जब किसी यौगिक में से एक परमाणु या समूह हटकर उसके स्थान पर दूसरा परमाणु/समूह आ जाता है, तो इसे प्रतिस्थापन अभिक्रिया कहते हैं। उदाहरण: मेथेन क्लोरीन के साथ सूर्य के प्रकाश में अभिक्रिया कर क्लोरोमेथेन बनाता है — CH₄ + Cl₂ →(सूर्य का प्रकाश) CH₃Cl + HCl

5. एस्टरीकरण अभिक्रिया (Esterification)

एल्कोहॉल और कार्बोक्सिलिक अम्ल की अभिक्रिया से एस्टर और जल बनता है। एस्टर में फलों जैसी सुगंध होती है। CH₃COOH + C₂H₅OH ⇌ CH₃COOC₂H₅ (एथिल एथेनोएट) + H₂O

🍶 एथेनॉल एवं एथेनॉइक अम्ल

एथेनॉल (C₂H₅OH / CH₃CH₂OH)

  • सामान्य नाम: एथिल एल्कोहॉल या स्पिरिट
  • यह रंगहीन, विशिष्ट गंध वाला द्रव है, जो जल में पूर्णतः घुलनशील है
  • क्वथनांक 78°C — कम क्वथनांक का कारण: कमजोर अंतरा-आण्विक बल
  • उपयोग: विलायक, दवाइयाँ (टिंचर आयोडीन), सिरका बनाना, ईंधन (मिश्रित)
  • दुरुपयोग: अधिक सेवन से लीवर खराब (सिरोसिस), गुर्दे व मस्तिष्क पर दुष्प्रभाव; औद्योगिक एल्कोहॉल में विषैला मेथेनॉल मिलाकर विकृत एल्कोहॉल बनाया जाता है ताकि लोग उसे पी न सकें

एथेनॉइक अम्ल (CH₃COOH)

  • सामान्य नाम: एसिटिक अम्ल; 5-8% जलीय विलयन को सिरका कहते हैं
  • तीखी गंध और खट्टा स्वाद वाला रंगहीन द्रव
  • क्वथनांक 118°C — कार्बोक्सिल समूह के कारण अंतरा-आण्विक हाइड्रोजन बंध
  • दुर्बल अम्ल है; सोडियम बाइकार्बोनेट (बेकिंग सोडा) के साथ अभिक्रिया कर CO₂ गैस छोड़ता है
  • उपयोग: सिरका बनाना, संरक्षक, रबर-प्लास्टिक उद्योग
🎯 MP Board टिप: ‘एथेनॉल और एथेनॉइक अम्ल के गुणों में अंतर’ पर तालिका बनाकर उत्तर लिखना सुनिश्चित करें — यह प्रश्न 2022, 2023 और 2025 के बोर्ड पेपर में आ चुका है।

🧼 साबुन एवं अपमार्जक (Soaps and Detergents)

साबुन (Soap): उच्च वसा अम्लों के सोडियम या पोटेशियम लवण साबुन कहलाते हैं। साबुन बनाने की प्रक्रिया को साबुनीकरण (Saponification) कहते हैं — वसा/तेल को सोडियम हाइड्रॉक्साइड (NaOH) के साथ गर्म करने पर साबुन और ग्लिसरॉल बनते हैं।

साबुन का अणु दो भागों से बना होता है: जलस्नेही सिरा (जल से प्रेम करने वाला — आयनिक भाग) और जलविरोधी सिरा (तेल/ग्रीस से प्रेम करने वाला — लंबी हाइड्रोकार्बन श्रृंखला)। जब साबुन को पानी में मिलाते हैं, तो इसके अणु मिसेल (Micelle) नामक गोल संरचना बनाते हैं, जिसमें जलविरोधी सिरे अंदर (तेल/गंदगी को घेरकर) और जलस्नेही सिरे बाहर होते हैं। इस प्रकार गंदगी पानी में धुल जाती है।

अपमार्जक (Detergents): साबुन कठोर जल (कैल्शियम/मैग्नीशियम लवण युक्त) में अच्छा झाग नहीं बनाता और अघुलनशील अवक्षेप बनाता है। इस समस्या को हल करने के लिए सिंथेटिक अपमार्जक बनाए गए, जो कठोर जल में भी अच्छी तरह कार्य करते हैं। अपमार्जकों में सल्फोनेट समूह (–SO₃Na) होता है। हालाँकि, अपमार्जक जैव-निम्नीकरणीय (biodegradable) नहीं होते, इसलिए ये जल प्रदूषण बढ़ाते हैं।

📊 महत्वपूर्ण रासायनिक समीकरण (संक्षिप्त सारांश)

अभिक्रिया रासायनिक समीकरण
मेथेन का दहन CH₄ + 2O₂ → CO₂ + 2H₂O
एथीन का हाइड्रोजनीकरण C₂H₄ + H₂ →(Ni) C₂H₆
एथेनॉल का ऑक्सीकरण C₂H₅OH + O₂ → CH₃COOH + H₂O
एस्टरीकरण CH₃COOH + C₂H₅OH ⇌ CH₃COOC₂H₅ + H₂O
साबुनीकरण वसा + NaOH → साबुन + ग्लिसरॉल
मेथेन + क्लोरीन (प्रतिस्थापन) CH₄ + Cl₂ →(प्रकाश) CH₃Cl + HCl

❓ अध्याय के महत्वपूर्ण प्रश्न (बोर्ड परीक्षा 2027)

प्रश्न 1: कार्बन की चतुःसंयोजकता किसे कहते हैं? उदाहरण सहित समझाइए। (2 अंक)

उत्तर: कार्बन की संयोजकता 4 होती है क्योंकि इसके सबसे बाहरी कक्ष में 4 इलेक्ट्रॉन होते हैं, जिन्हें यह साझा करके अष्टक पूर्ण करता है। इसे चतुःसंयोजकता कहते हैं। उदाहरण: मेथेन (CH₄) में कार्बन 4 हाइड्रोजन परमाणुओं से 4 सहसंयोजी बंध बनाता है।

प्रश्न 2: सहसंयोजी बंध क्या है? H₂, O₂ और N₂ के बंध निर्माण को चित्र द्वारा समझाइए। (3 अंक)

उत्तर: जब दो परमाणु इलेक्ट्रॉन साझा करते हैं तो बना बंध सहसंयोजी बंध कहलाता है। H₂ में एक एकल बंध (H–H), O₂ में द्वि-बंध (O=O) और N₂ में त्रि-बंध (N≡N) होता है। इलेक्ट्रॉन साझा करने से प्रत्येक परमाणु अष्टक पूर्ण करता है।

प्रश्न 3: हीरा और ग्रेफाइट की संरचना में अंतर लिखिए तथा बताइए ग्रेफाइट विद्युत का सुचालक क्यों है? (3 अंक)

उत्तर: हीरे में प्रत्येक कार्बन 4 अन्य कार्बन से त्रिविमीय जालक में जुड़ा होता है, अतः कोई मुक्त इलेक्ट्रॉन नहीं होता — यह कुचालक है। ग्रेफाइट में प्रत्येक कार्बन 3 अन्य कार्बन से जुड़ा होता है और प्रत्येक परत में एक मुक्त इलेक्ट्रॉन शेष रहता है, जो विद्युत चालन करता है।

प्रश्न 4: संतृप्त और असंतृप्त हाइड्रोकार्बन में अंतर लिखिए। (2 अंक)

उत्तर: संतृप्त हाइड्रोकार्बन (एल्केन) में केवल एकल बंध (C–C) होता है, सामान्य सूत्र CₙH₂ₙ₊₂, कम क्रियाशील। असंतृप्त हाइड्रोकार्बन (एल्कीन/एल्काइन) में द्वि/त्रि-बंध होता है, सामान्य सूत्र CₙH₂ₙ या CₙH₂ₙ₋₂, अधिक क्रियाशील।

प्रश्न 5: क्रियात्मक समूह किसे कहते हैं? चार क्रियात्मक समूहों के नाम व सूत्र लिखिए। (3 अंक)

उत्तर: अणु का वह विशेष समूह जो यौगिक के रासायनिक गुण निर्धारित करता है, क्रियात्मक समूह कहलाता है। उदाहरण: हाइड्रॉक्सिल (–OH), एल्डिहाइड (–CHO), कार्बोक्सिल (–COOH), कीटोन (>C=O)।

प्रश्न 6: होमोलॉगस श्रेणी किसे कहते हैं? इसके दो लक्षण लिखिए। (2 अंक)

उत्तर: कार्बनिक यौगिकों की वह श्रेणी जिसमें प्रत्येक सदस्य पिछले सदस्य से –CH₂ से भिन्न होता है, होमोलॉगस श्रेणी कहलाती है। लक्षण: (1) सभी सदस्यों का सामान्य सूत्र समान होता है, (2) रासायनिक गुण समान होते हैं।

प्रश्न 7: वनस्पति तेल को वनस्पति घी में कैसे बदला जाता है? रासायनिक अभिक्रिया लिखिए। (2 अंक)

उत्तर: वनस्पति तेल (असंतृप्त) में निकेल उत्प्रेरक की उपस्थिति में हाइड्रोजन गैस मिलाकर वनस्पति घी (संतृप्त) बनाया जाता है। यह योगात्मक अभिक्रिया (हाइड्रोजनीकरण) है: तेल + H₂ →(Ni) घी।

प्रश्न 8: एथेनॉल के दो उपयोग एवं दो दुष्प्रभाव लिखिए। (2 अंक)

उत्तर: उपयोग: (1) विलायक के रूप में, (2) दवाइयों (टिंचर आयोडीन) में। दुष्प्रभाव: (1) अधिक सेवन से लीवर सिरोसिस, (2) गुर्दे व मस्तिष्क को क्षति।

प्रश्न 9: साबुन की मिसेल संरचना समझाइए। कठोर जल में साबुन काम क्यों नहीं करता? (3 अंक)

उत्तर: साबुन के अणु जल में गोलाकार मिसेल बनाते हैं, जिसमें जलविरोधी सिरे अंदर गंदगी को घेरते हैं और जलस्नेही सिरे बाहर रहते हैं। कठोर जल में Ca²⁺/Mg²⁺ आयन साबुन से अघुलनशील अवक्षेप बनाते हैं, जिससे झाग नहीं बनता और सफाई नहीं होती।

प्रश्न 10: IUPAC पद्धति से निम्न का नाम लिखिए: CH₃OH, CH₃CHO, CH₃COOH, CH₃COCH₃ (2 अंक)

उत्तर: CH₃OH = मेथेनॉल, CH₃CHO = एथेनल, CH₃COOH = एथेनॉइक अम्ल, CH₃COCH₃ = प्रोपेनोन।

🎯 परीक्षा टिप्स (2027 बोर्ड परीक्षा के लिए)

  1. इस अध्याय में चित्र बनाना अनिवार्य है — सहसंयोजी बंध, हीरा-ग्रेफाइट संरचना, मिसेल बनाना सीखें। चित्र पर 1-2 अंक दिए जाते हैं।
  2. सभी रासायनिक समीकरणों को संतुलित रूप में लिखने का अभ्यास करें — असंतुलित समीकरण पर पूरे अंक नहीं मिलते।
  3. क्रियात्मक समूहों की तालिका और होमोलॉगस श्रेणी को रटने के बजाय पैटर्न समझकर याद करें — CₙH₂ₙ₊₂, CₙH₂ₙ, CₙH₂ₙ₋₂।
  4. पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों (PYQs) में इस अध्याय से आए प्रश्नों को हल करें — सबसे अधिक दोहराए जाने वाले प्रश्न: चतुःसंयोजकता, सहसंयोजी बंध, हीरा-ग्रेफाइट, साबुन-अपमार्जक।
  5. उत्तर में कीवर्ड (श्रृंखलन, चतुःसंयोजकता, इलेक्ट्रॉन साझा करना, मिसेल) अवश्य लिखें — परीक्षक इन्हीं पर अंक देते हैं।

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📚 अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1: कार्बन का परमाणु क्रमांक और इलेक्ट्रॉनिक विन्यास क्या है?

कार्बन का परमाणु क्रमांक 6 है और इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 4 है। इसके सबसे बाहरी कक्ष में 4 इलेक्ट्रॉन होते हैं, जिसके कारण इसकी संयोजकता 4 होती है।

प्रश्न 2: कार्बन के यौगिकों की संख्या इतनी अधिक क्यों है?

कार्बन के यौगिकों की संख्या अधिक होने के दो कारण हैं — श्रृंखलन (कार्बन की अपने ही परमाणुओं से लंबी श्रृंखला बनाने की क्षमता) और चतुःसंयोजकता (4 स्थायी सहसंयोजी बंध बनाने की क्षमता)। कार्बन-कार्बन बंध अत्यंत स्थायी होता है।

प्रश्न 3: सहसंयोजी बंध और आयनिक बंध में क्या अंतर है?

सहसंयोजी बंध इलेक्ट्रॉन साझा करने से बनता है, जबकि आयनिक बंध इलेक्ट्रॉन के पूर्ण स्थानांतरण से बनता है। सहसंयोजी यौगिक विद्युत के कुचालक होते हैं जबकि आयनिक यौगिक (पिघली अवस्था या विलयन में) चालक होते हैं।

प्रश्न 4: हीरा और ग्रेफाइट दोनों कार्बन से बने हैं, फिर ग्रेफाइट मुलायम और हीरा कठोर क्यों?

हीरे में प्रत्येक कार्बन 4 अन्य कार्बन से मजबूत त्रिविमीय जालक में जुड़ा होता है, इसलिए यह सबसे कठोर पदार्थ है। ग्रेफाइट में परतदार संरचना होती है जिसमें परतें एक-दूसरे पर खिसक सकती हैं, इसलिए यह मुलायम होता है।

प्रश्न 5: वनस्पति तेल से वनस्पति घी कैसे बनता है?

वनस्पति तेल (असंतृप्त हाइड्रोकार्बन) में निकेल उत्प्रेरक की उपस्थिति में हाइड्रोजन गैस मिलाई जाती है। इस योगात्मक अभिक्रिया (हाइड्रोजनीकरण) से असंतृप्त बंध संतृप्त हो जाते हैं और वनस्पति घी बन जाता है।

प्रश्न 6: एथेनॉल और एथेनॉइक अम्ल में मुख्य अंतर क्या है?

एथेनॉल (C₂H₅OH) एक एल्कोहॉल है जिसमें हाइड्रॉक्सिल समूह होता है, जबकि एथेनॉइक अम्ल (CH₃COOH) में कार्बोक्सिल समूह होता है। एथेनॉइक अम्ल दुर्बल अम्ल है, सोडियम बाइकार्बोनेट से CO₂ छोड़ता है, जबकि एथेनॉल उदासीन है।

प्रश्न 7: साबुन और अपमार्जक में क्या अंतर है?

साबुन उच्च वसा अम्लों के सोडियम/पोटेशियम लवण होते हैं और कठोर जल में अवक्षेप बनाकर काम नहीं करते। अपमार्जक सिंथेटिक होते हैं, कठोर जल में भी कार्य करते हैं, परंतु जैव-निम्नीकरणीय नहीं होने से जल प्रदूषण बढ़ाते हैं।

प्रश्न 8: IUPAC नामकरण में ‘एथेनॉल’ नाम कैसे बना?

एथेनॉल दो कार्बन वाले एल्केन (ईथेन) से बना है — मूल नाम ‘एथ’ + संतृप्त श्रृंखला का प्रत्यय ‘-एन’ + एल्कोहॉल का प्रत्यय ‘-ऑल‘। अतः C₂H₅OH का IUPAC नाम एथेनॉल है।

प्रश्न 9: कार्बन की चतुःसंयोजकता का अर्थ क्या है?

चतुःसंयोजकता का अर्थ है कार्बन की 4 सहसंयोजी बंध बनाने की क्षमता। इसके बाहरी कक्ष में 4 इलेक्ट्रॉन होने के कारण यह 4 इलेक्ट्रॉन साझा करता है, जैसे मेथेन (CH₄) में कार्बन 4 हाइड्रोजन से बंध बनाता है।

प्रश्न 10: समावयव क्या होते हैं? उदाहरण दीजिए।

समान अणुसूत्र परंतु भिन्न संरचना वाले यौगिक समावयव कहलाते हैं। उदाहरण: ब्यूटेन (C₄H₁₀) के दो समावयव — n-ब्यूटेन (सीधी श्रृंखला) और आइसोब्यूटेन (शाखित श्रृंखला)।

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