MP Board Class 10 SST Pol Science Ch2: Federalism Notes 2027
MP Board Class 10 Social Science (राजनीति विज्ञान) Chapter 2: संघवाद (Federalism) — एक महत्वपूर्ण अध्याय है जो भारत की शासन संरचना को समझने में मदद करता है। MP Board परीक्षा में इस अध्याय से 5-7 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। इस नोट्स में हम संघवाद के अर्थ, विशेषताओं, भारत में संघीय व्यवस्था और उसकी चुनौतियों को विस्तार से समझेंगे।
📑 विषय सूची
- संघवाद का अर्थ एवं परिभाषा
- संघवाद की प्रमुख विशेषताएँ
- संघवाद के प्रकार
- भारत में संघीय व्यवस्था
- भारतीय संघवाद की विशेषताएँ
- केंद्र-राज्य संबंध
- संघवाद की चुनौतियाँ
- महत्वपूर्ण प्रश्न (Previous Year Questions)
1. संघवाद का अर्थ एवं परिभाषा (Meaning of Federalism)
संघवाद शासन की वह व्यवस्था है जिसमें सत्ता का विभाजन केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के बीच किया जाता है। यह एक द्विस्तरीय शासन प्रणाली है जिसमें:
- केंद्र सरकार — पूरे देश का प्रतिनिधित्व करती है
- राज्य सरकारें — अपने-अपने राज्यों का प्रशासन देखती हैं
संघवाद की दो मुख्य विशेषताएँ हैं — सत्ता का विभाजन और संवैधानिक सर्वोच्चता। संविधान ही सरकार का सर्वोच्च स्रोत होता है और कोई भी सरकार (केंद्र या राज्य) संविधान के विरुद्ध कार्य नहीं कर सकती।
📌 परिभाषा: के.सी. व्हेयर के अनुसार — “संघीय शासन वह है जिसमें केंद्र और राज्य सरकारें संविधान द्वारा विभाजित शक्तियों का प्रयोग करती हैं और कोई भी सरकार दूसरे पर पूर्ण नियंत्रण नहीं रखती।”
2. संघवाद की प्रमुख विशेषताएँ (Key Features of Federalism)
- सत्ता का संवैधानिक विभाजन: शक्तियाँ संविधान द्वारा केंद्र और राज्यों के बीच विभाजित होती हैं। यह विभाजन संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची के माध्यम से होता है।
- लिखित संविधान: संघीय व्यवस्था में लिखित संविधान आवश्यक है जो सरकार के ढाँचे और शक्तियों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करता है।
- स्वतंत्र न्यायपालिका: सर्वोच्च न्यायालय संविधान का संरक्षक होता है और केंद्र-राज्य विवादों का निपटारा करता है।
- द्विसदनीय विधायिका: ऊपरी सदन (राज्यसभा) राज्यों का प्रतिनिधित्व करता है और निचला सदन (लोकसभा) देश की जनता का।
- संविधान की सर्वोच्चता: कोई भी सरकार संविधान के प्रावधानों का उल्लंघन नहीं कर सकती।
- कठोर संवैधानिक संशोधन प्रक्रिया: संविधान में संशोधन के लिए केंद्र और राज्यों दोनों की सहमति आवश्यक है।
3. संघवाद के प्रकार (Types of Federalism)
| प्रकार | विवरण | उदाहरण |
|---|---|---|
| सहकारी संघवाद | केंद्र और राज्य मिलकर काम करते हैं, आपसी सहयोग पर जोर | भारत, अमेरिका |
| द्वैध संघवाद | केंद्र और राज्य अपने-अपने क्षेत्रों में स्वतंत्र | कनाडा, ऑस्ट्रेलिया |
| असममित संघवाद | अलग-अलग राज्यों को अलग-अलग शक्तियाँ | भारत (जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा, पूर्वोत्तर राज्यों को विशेष प्रावधान) |
4. भारत में संघीय व्यवस्था (Federal System in India)
भारत का संविधान भारत को “राज्यों का संघ” (Union of States) कहता है — न कि “संघीय राज्य” (Federation of States)। इसका अर्थ है कि भारतीय संघ राज्यों के बीच किसी समझौते का परिणाम नहीं है, बल्कि यह एक अटूट संघ है।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 1 के अनुसार — “इंडिया, दैट इज़ भारत, शैल बी ए यूनियन ऑफ़ स्टेट्स।”
भारत की तीन सूचियाँ (Three Lists)
| सूची | विषय | संख्या |
|---|---|---|
| संघ सूची (Union List) | रक्षा, विदेश, रेलवे, मुद्रा, परमाणु ऊर्जा — राष्ट्रीय महत्व के विषय | 97 विषय |
| राज्य सूची (State List) | पुलिस, कृषि, स्थानीय प्रशासन — राज्य स्तर के विषय | 66 विषय |
| समवर्ती सूची (Concurrent List) | शिक्षा, वन, विवाह — जहाँ केंद्र और राज्य दोनों कानून बना सकते हैं | 47 विषय |
अवशिष्ट शक्तियाँ (Residuary Powers)
जो विषय तीनों सूचियों में शामिल नहीं हैं, उन पर कानून बनाने का अधिकार केंद्र सरकार को है। यह भारतीय संघवाद की एक महत्वपूर्ण विशेषता है जो केंद्र को अधिक शक्तिशाली बनाती है।
5. भारतीय संघवाद की विशेषताएँ (Features of Indian Federalism)
- केंद्र की ओर झुकाव: भारतीय संविधान केंद्र को अधिक शक्तिशाली बनाता है — एकल संविधान, एकल नागरिकता, राष्ट्रपति द्वारा राज्यपाल की नियुक्ति, और अवशिष्ट शक्तियाँ केंद्र के पास।
- एकल नागरिकता: भारत में एकल नागरिकता (Single Citizenship) है — नागरिक सीधे केंद्र से जुड़ा होता है, राज्य से नहीं।
- राज्यपाल की नियुक्ति: राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति (केंद्र) द्वारा की जाती है, न कि राज्य सरकार द्वारा।
- राष्ट्रीय आपातकाल: आपातकाल के दौरान संघीय ढाँचा एकात्मक में बदल जाता है — केंद्र राज्यों को निर्देश दे सकता है।
- एकीकृत न्यायपालिका: सर्वोच्च न्यायालय उच्च न्यायालयों से ऊपर है — यह अमेरिका की दोहरी न्यायपालिका से भिन्न है।
- अखिल भारतीय सेवाएँ: IAS, IPS जैसी सेवाओं का नियंत्रण केंद्र के पास है, जबकि ये राज्यों में कार्यरत रहती हैं।
6. केंद्र-राज्य संबंध (Centre-State Relations)
भारत में केंद्र-राज्य संबंध तीन आयामों में देखे जाते हैं:
- विधायी संबंध: केंद्र राज्य सूची के विषयों पर भी कुछ शर्तों में कानून बना सकता है (राज्यसभा के प्रस्ताव पर)।
- प्रशासनिक संबंध: केंद्र राज्यों को निर्देश दे सकता है और राज्यों को केंद्रीय कानूनों का पालन करना होता है।
- वित्तीय संबंध: वित्त आयोग (Finance Commission) केंद्र और राज्यों के बीच करों के वितरण की सिफारिश करता है। राज्य अपने कर स्वयं लगाते हैं लेकिन केंद्र से अनुदान भी प्राप्त करते हैं।
7. संघवाद की चुनौतियाँ (Challenges of Federalism)
- केंद्रीकरण की प्रवृत्ति: भारत में शक्तियों का अत्यधिक केंद्रीकरण — राज्य अक्सर केंद्र पर निर्भर रहते हैं।
- राज्यों के बीच असमानता: बड़े और छोटे राज्यों के बीच संसाधनों और विकास में अंतर।
- भाषाई और क्षेत्रीय विवाद: सीमा विवाद, जल बंटवारा, और भाषाई अल्पसंख्यकों के मुद्दे।
- राज्यपाल की भूमिका: राज्यपाल को केंद्र का एजेंट मानने का विवाद — विपक्षी शासित राज्यों में अक्सर टकराव।
- आपातकालीन प्रावधान: अनुच्छेद 356 (राष्ट्रपति शासन) का दुरुपयोग — राज्य सरकार को हटाने के लिए राजनीतिक उपयोग।
💡 सुधार के प्रयास: सरकारिया आयोग (1983) और पुंछी आयोग (2007) ने केंद्र-राज्य संबंधों में सुधार के लिए सिफारिशें कीं। 1992 के 73वें और 74वें संशोधनों ने स्थानीय स्वशासन (पंचायत और नगरपालिका) को संवैधानिक दर्जा दिया — यह विकेंद्रीकरण की दिशा में बड़ा कदम था।
8. महत्वपूर्ण प्रश्न (Important Questions)
📅 2024, 2023 — 5 अंक: भारतीय संघवाद की कोई चार विशेषताएँ लिखिए।
📅 2023, 2022 — 3 अंक: संघ सूची और राज्य सूची में अंतर बताइए।
📅 2024 — 3 अंक: संघवाद की चार प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
📅 2022 — 5 अंक: भारत में केंद्र-राज्य संबंधों की व्याख्या कीजिए।
📅 2023 — 1 अंक: संविधान का कौन-सा अनुच्छेद भारत को ‘राज्यों का संघ’ कहता है? (उत्तर: अनुच्छेद 1)
📅 2024 — 1 अंक: संघ सूची में कितने विषय हैं? (उत्तर: 97 विषय)
📅 2021 — 5 अंक: भारतीय संघवाद को ‘केंद्र प्रधान संघवाद’ क्यों कहा जाता है? स्पष्ट कीजिए।
📅 2022 — 3 अंक: समवर्ती सूची से आप क्या समझते हैं? इसके तीन विषय लिखिए।
🎯 निष्कर्ष: संघवाद भारतीय लोकतंत्र की आधारशिला है। यह विविधता में एकता का व्यावहारिक रूप है जहाँ अलग-अलग राज्यों को अपनी सांस्कृतिक पहचान बनाए रखने की स्वतंत्रता है, जबकि राष्ट्रीय एकता भी बनी रहती है। 1990 के दशक के बाद से सहकारी संघवाद और विकेंद्रीकरण पर अधिक जोर दिया गया है। MP Board परीक्षा में इस अध्याय से प्रायः केंद्र-राज्य संबंध, सूचियों में अंतर और भारतीय संघवाद की विशेषताओं पर प्रश्न पूछे जाते हैं।